रवि जहाँ ना पहुँच पाए ... कवि वहाँ भी दृष्टि कर देते हैं रवि जहाँ ना पहुँच पाए ... कवि वहाँ भी दृष्टि कर देते हैं
अंदर अंदर कुछ कचोटता है खुलेपन की बिंदास मुस्कुराहट ओढे़ खुद ही खुद से लड़ती हैं बेबाक औरतें बहुत ... अंदर अंदर कुछ कचोटता है खुलेपन की बिंदास मुस्कुराहट ओढे़ खुद ही खुद से लड़ती है...
सोच लोगों की सोच लोगों की
मन के खोखलेपन को अब ना मंज़िल की रुकावट बनने दे। मन के खोखलेपन को अब ना मंज़िल की रुकावट बनने दे।
अक्सर मेरी नींदों में क्या अब भी मुझे बुलाता है ! अक्सर मेरी नींदों में क्या अब भी मुझे बुलाता है !